आज कल कम्युनिष्ट दल जॉर्ज बुश की भारत यात्रा के विरोध में दिल्ली की सडकों पर दीवालों पर नारे पोत रहें हैं। अब मुझे जॉर्ज बुश से तो कोई विशेष प्रेम नहीं है पर मेरी यह समझ नहीं आता है कि जब यही दल आज तक किसी के विरोध में नहीं बोले तो बुश ने इनकी कौन सी भैंस खोल ली जो इनका यह हाल है। अगर इतिहास को देखा जाए तो इन दलों ने कभी भी
- सद्दाम हुसैन का विरोध नहीं किया
- चीन की कमुनिष्ट पार्टी द्वारा अपने ही नागरिकों के प्रति किये गये बर्बर व्यवहार (Tinanmen Square) का कोई विरोध नहीं किया
- मुझे कोई याद तो नहीं, पर मेरे ख्याल से कभी स्टालिन का भी विरोध नहीं किया
- हजारों भारतीयों की हत्या के लिये प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर से जिम्मेदार मुशर्रफ़ का भी कोई विरोध नहीं किया
तो फिर बुश के प्रति इनका प्यार क्यों उमड़ा पड़ रहा है।
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