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मुलायम और कम्युनिष्टों का ईरान से आकस्मिक प्रेम

February 12th, 2006 · No Comments

आज दिन भर टीवी चैनलों पर यह बात की जा रही थी कि मुलायम सिंह यादव एक तीसरा मोर्चा बनाने जा रहें है जो कि यूपीए की सरकार के खिलाफ़ संसद में अविस्वास प्रस्ताव ले कर आएगा और चंद्रबाबू नायडू ने इस प्रस्ताव को समर्थन देने का फ़ैसला किया है। यह चंद्रबाबू वही हैं जो कि एनडीए की सरकार को पाँच साल तक बाहर से समर्थन देते रहे थे और जिनको मुलायम सिंह “कम्मुनल फ़ोर्सेस” कहते रहते थे।

खैर मेरी सम्स्या चंद्रबाबू का वह वक्तव्य है जो कि उन्होने मुलायम सिंह से वार्ता के बाद में दिया जुसमें उन्होने कहा कि भारत को ईरान के खिलाफ वोट इसलिये नहीं देना चाहिये था क्योंकि भारत में काफी सँख्या में मुसलमान हैं। अब मेरी समझ में यह नहीं आता कि इन दोनों बातों में क्या संबंध है।

जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि ईरान पाकिस्तान के साथ आणविक हथियारों के बारे मे मदद करता रहा है और पाकिस्तान का आणविक कार्यक्रम सिर्फ भारत के प्रति दुश्मनी से प्रेरित है। मेरा तो यह मानना है कि भारत सरकार और माननीय मनमोहन सिहं इस मामले पर देश के हित में ही फैसला लेगें और ऎसी सरकार को आणविक मामले में समर्थन नहीं देंगे जो कि भारत के सबसे बडे दुश्मन के साथ मिलकर आणविक हथियार बना रही थी।

Tags: हमें देखना है

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