आज दिन भर टीवी चैनलों पर यह बात की जा रही थी कि मुलायम सिंह यादव एक तीसरा मोर्चा बनाने जा रहें है जो कि यूपीए की सरकार के खिलाफ़ संसद में अविस्वास प्रस्ताव ले कर आएगा और चंद्रबाबू नायडू ने इस प्रस्ताव को समर्थन देने का फ़ैसला किया है। यह चंद्रबाबू वही हैं जो कि एनडीए की सरकार को पाँच साल तक बाहर से समर्थन देते रहे थे और जिनको मुलायम सिंह “कम्मुनल फ़ोर्सेस” कहते रहते थे।
खैर मेरी सम्स्या चंद्रबाबू का वह वक्तव्य है जो कि उन्होने मुलायम सिंह से वार्ता के बाद में दिया जुसमें उन्होने कहा कि भारत को ईरान के खिलाफ वोट इसलिये नहीं देना चाहिये था क्योंकि भारत में काफी सँख्या में मुसलमान हैं। अब मेरी समझ में यह नहीं आता कि इन दोनों बातों में क्या संबंध है।
जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि ईरान पाकिस्तान के साथ आणविक हथियारों के बारे मे मदद करता रहा है और पाकिस्तान का आणविक कार्यक्रम सिर्फ भारत के प्रति दुश्मनी से प्रेरित है। मेरा तो यह मानना है कि भारत सरकार और माननीय मनमोहन सिहं इस मामले पर देश के हित में ही फैसला लेगें और ऎसी सरकार को आणविक मामले में समर्थन नहीं देंगे जो कि भारत के सबसे बडे दुश्मन के साथ मिलकर आणविक हथियार बना रही थी।
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